Posted by [email protected] on March 13, 2015 at 6:50 AM
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अक्स आईने के हज़ार टुकड़ों मे बिखर गया
हर काँच को हीरे सा तराश लिया मैंने
बहार दबे पाँव कतरा के निकल गयी
दो चार गुलों से बाग महका लिया मैंने
मुस्कुरा के बिजली मिसमार कर गयी
हौसले से वीराना रोशन कर लिया मैंने
फुर्सत मे एक नज़र देख लेना, परवरदिगार
तू भी कहेगा क्या फाजिल हस्ती बना दिया मैंने
Oops!
Oops, you forgot something.