Posted by [email protected] on March 15, 2015 at 7:00 AM
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पल इतना भारी है , कुछ ठहर सा गया
वक़्त जो भी गुज़रा, गुज़र तो गया
खाम खयाली से परेशान होते रहे
इक ख्याल गर निबटा , निबट तो गया
रंज बहुत संभाले, बिखर ही गए
इक दर्द गर सिमटा, सिमट तो गया
बा-खैरो आफियत, अश्क रोके रहे
सावन बनके बरसा, बरस तो गया
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