Posted by [email protected] on March 19, 2015 at 7:25 AM
|
|
इक कतरा आसमान का, इक ज़र्रा ज़मीन का
काफी है ज़िंदगी, बसर के लिए
इक लौ एतबार की, इक इल्तेहाब प्यार
काफी है ,मीठी सहर के लिए
इक मुट्ठी चाँदनी, इक शमीम झोंका
काफी है, जांविदा असर के लिए
इक उजूरे दौर, इक इन्हेताती दौर
काफी है इक मौज, लहर के लिए
इक दुआ अर्श पर, इक फज्ल फर्श पर
काफी है उसकी महर के लिए
Oops!
Oops, you forgot something.