Posted by [email protected] on March 25, 2015 at 2:15 AM
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न कुरेदो इन ज़ख़्मों को
वक़्त की तह ने शिद्दत से छिपा रखा है
न लगाओ नज़र इन नज़ारों को
चाँदनी ने लाखों चकोरों को छिपा रखा है
न लगा मोल मेरे वजूद का
कामयाबी ने तमाम कोशिशो को छिपा रखा है
न इल्ज़ाम लगा मेरे नजासत को
गर्द की ओट मे पाकीज़गी को छिपा रखा है
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