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HAALAAT

Posted by [email protected] on March 27, 2015 at 2:25 AM

कल कल करती हंसी, वो नटखट सी अटखेलियाँ

ज़माने की उम्मीदों मे, बच्चों का बचपन खो गया


हलचल भरी ज़िंदगी , वो अनबूझ सी पहेलियाँ

हरपल के इस बोझ मे , बड़ों का बड़प्पन खो गया


छल निश्छल के हादसे, वो तजुर्बों की बेरूखियाँ

चुपचाप के इज़हार मे , गैरों का बेगानापन खो गया


सरल विरल से रास्ते , वो अनमिट सी दूरियाँ

मीठी सी मुलाक़ात मे , तनहाई का खालीपन खो गया

 

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