Posted by [email protected] on March 29, 2015 at 2:35 AM
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अरसा ए हयात की जद्दो जहद
कुछ लम्हो मे जता दी
जहाने बेदार की रोजाना आज़माइश
कुछ साँसो मे गिना दी
स्याह वक़्त की जब्रे मसल्सल
कुछ लफ्जों मे बता दी
आपकी मुखत्सरी का आलम क्या कहिए
मुद्दत उल उम्र मेरी किस तरह बयां की
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