Posted by [email protected] on April 21, 2015 at 12:30 AM
|
|
रहने दो कोयले की खान मे
यूं शीशे के बाज़ार मे बिक जाना मुझे मंजूर नहीं।
रहने दो तसल्ली से अंधेरों मे
यूं रुसवाइयों के उजालों से आँख मिलाना मंजूर नहीं।
रहने दो सच्चाई की खलवत मे
यूं फ़रेबियों की महफिल मे झूठी शोहरत मंजूर नहीं।
Oops!
Oops, you forgot something.