Posted by [email protected] on February 8, 2016 at 4:35 AM
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गिरां बार है ज़ीस्त
समान ज़रा हल्का रखिए
अय्यार है बिसाते ज़िंदगी
चाल ज़रा हल्का रखिए
फ़रेबे बक़ा है हयात
उम्मीद ज़रा हल्का रखिए
यौमे मलामत है इमरोज
मन ज़रा हल्का रखिए
बिखर गए हैं शिकस्ता ख्वाब
क़दम ज़रा हल्का रखिए
Oops!
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